क्या आपने सरकारी या गैरसरकारी संस्थाओं के बहकावे या दबाव में आकर अपना व अपने प्रियजनों का आधार कार्ड बनवा लिया और बिना सोचें-समझें उन्हें सोप दिया । रूक कर सोचिए कहीं आप अनजाने में ही भारी गलती तो नहीं कर बैठें हैं । जानिएं आधार कार्ड की सच्चाई के बारे में - आधार कार्ड - (यू.आई.डी.ए.आई) यह भारत की विशिष्ट पहचान प्राधिकरण है । (UIDAI) Unique Identification Authority of India. यह भारत की केंद्र सरकार की एजेंसी द्वारा निर्मित है । भारत सरकार द्वारा भारत के प्रत्येक नागरिक की पहचान को पुख्ता करने के लिए 2009 में भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यू.आई.डी.ए.आई) (UIDAI) का गठन किया गया था। जबकि आम व्यक्ति के निजी स्वतंत्रता के हनन के चलते इस तरह की आई.डी. को किसी भी देश की सरकार या कानून ने मंजूरी नहीं दी है और न ही वहाँ की सरकारी व गैरसरकारी एजेंसियों को इस तरह की आई.डी. बनवाने, बनाने या मांगे की प्रमिशन दी है । यू.आई.डी.ए.आई (UIDAI) का कार्य 12 अंकों की विशिष्ट पहचान प्रत्येक नागरिक को उपलब्ध करवाना है। 12 अंकों की इस विशिष्ट पहचान को ही आधार कार्ड कहा गया है। आधार कार्ड के माध्यम से भारत सरकार नागरिकों की पहचान को डाटाबेस द्वारा अपने रिकार्ड में सुरक्षित रखने की हामी भर रही है। "पर यह कितना सुरक्षित है यह आप स्वयं जान सकतें हैं। इसके लिए आप नजदीकी प्राईवेट बैंक में जाइये। कहिए की मेरे पास कुछ धन राशि है और मैं जल्दी से अपना खाता यहाँ खुलवाना चाहता हूँ । मैंने आधार आई.डी. बनवाई हुई है पर वह घर पर रह गई । मैं उसका प्रयोग करना चाहता हूँ । फिर आप बैंक के कर्मचारियों का कमाल देखिए। वे आपके अंगूठो या उंगलियों की स्कैनिंग करके आपके आधार कार्ड का प्रिंट निकाल देंगे।" आप अपने एंडरोएंड फोन में स्कैनिंग बारकोड की एप डाउनलोड कीजिए, अपने आधार कार्ड के चकोर बारकोड को स्कैन कीजिए और नेट प्रयोग करके देखिए। आपकी मूलभूत जानकारी खुले में पड़ी हैं। केवल आपके आधार कार्ड के 12 अंकों के बल पर कोई एजेंसी जिसको प्रमिशन है आपकी सभी जानकारी प्राप्त कर सकती है। सरकार के अनुसार, आधार कार्ड के माध्यम से भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण नागरिकों के विषय में हर गोपनीय जानकारी भी हासिल कर सकेगा। जैसे आपका व आपके माता-पिता का नाम, पता, जाति, धर्म, आपका फोन नंबर उसकी सहायता से आपकी लोकेशन, उम्र, जन्मतिथि, शिक्षा, व्यवसाय, आमदनी, जमीन, जायदाद, प्रोपर्टी, बैंक की जानकारी, पैन नंबर की जानकारी, विभिन्न प्रकार की आई.डी. के कोड व उनकी सम्पूर्ण जानकारी जैसे - राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पोस्पोर्ट, वीजा, वोटर आई.डी., स्कूल कालेज आई.डी., जन्म प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र, रिहायशी प्रमाणपत्र, सभी बैंक खातों का पूरा विवरण के साथ-साथ आपकी उँगलियों कि निशानी, आपकी फोटो और आखों कि स्कैनिंग सभी इसमें शामिल हैं । यह यहाँ तक ही सीमित नहीं रहा
बल्कि इसके अलावा आपने एटीएम कार्ड, केस कार्ड, डेबीट कार्ड का कहाँ- कहाँ प्रयोग किया व क्या-क्या खरीदारियाँ की, आप किस दिन कौन से होटल या धर्मशाला में किन- किन लोगों के साथ ठहरे। कौन से सरकारी या गैरसरकारी हस्पताल में आपने अपना व अपने प्रियजनों इलाज करवाया, आपके कितने बच्चे बचे हैं कितने पैदा हुए कितने मर गए सभी सभी की जानकारी। आपने कहाँ-कहाँ अपना पैसा लगाया जैसे शेयर बाजार, सोना या हीरा बाजार । कितना लोन लिया, कितना कर्ज बाकी है, कितना टैक्स जमा कराया कितना बाकी है, आप कौन कौन से सरकारी लाभ ले रहे हो। कहाँ छूट व सब्सिडी मिली है। सब की सब सम्पूर्ण जानकारी आपके 12 अंकों के डाटाबेस में लोड होती रहेगी । और कोई भी सरकारी या गैसरकारी एजेंसी चुटकी भर में आपकी इजाजत के बगैर आपकी सम्पूर्ण जानकारी हासिल कर लेगी । यहाँ तक की आपकी सम्पूर्ण जानकारी अपने देश तक ही सीमित नहीं रहेंगी बल्कि विदेशी एजेंसियां भी इसे सुगमता से हासिल कर सकेंगी । आपने जिन दो आई.डी. का प्रयोग कर आधार कार्ड बनवाया है वो और वो सभी जो आधार कार्ड से लिंक हो रही हैं या होती जा रही हैं के बल पर आपकी सम्पूर्ण जानकारी किसी भी समय हासिल की जा सकती है। आप जहाँ-जहाँ भी अपनी उंगलियों की छाप छोड़ते जाओगे या निगरानी कैमरों से अपनी आँखें दो चार करते जाओगे वहाँ-वहाँ आप अपनी सम्पूर्ण जानकारी छोड़ते जाओगे। अर्थात् आप उठते-बैठते, चलते-फिरते आपनी सारी जानकारी बिखेरते जाओगे। क्या यह पूर्णत आम व्यक्ति की निजता का घोर हनन नहीं है? सरकार का मत है की आधार कार्ड की सहायता से किसी भी दुर्घटना से ग्रस्त व्यक्ति की जानकारी हासिल कर उससे तत्काल सहायता दी जा सकती है। पर वह आम लोंगों से यह दूसरा पहलू छुपाना चाहती है की दुर्घटना ग्रस्त व्यक्ति की अगर कोई आम व्यक्ति सहायता करें और किसी कारण दुर्घटना ग्रस्त व्यक्ति की मौके पर ही मृत्यु हो जाए तो पुलिस सहायता करने वाले वाले व्यक्ति के उंगलियों की छाप की सहायता से उस व्यक्ति के घर पर मिनटों में पहुंच जाएंगी और आम व्यक्ति को ये साबित करने में तमाम उम्र लग जाएंगी की वह निर्दोष है। माननीय सुप्रीम कोर्ट में आम व्यक्ति द्वारा सरकार के खिलाफ डाली याचिका के बाद 23 जून 2015 व फिलहाल के आदेश 15 अक्टूबर 2015 के अनुसार आगामी आदेशों तक किसी भी व्यक्ति को आधार कार्ड के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। अगर ऐसा करता हुआ कोई पाया जाता है तो वह माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना माना जाएगा
इन आदेशों के कुछ समय बाद ही किसी याचिकर्ता की याचिका के बाद वोटर आई.डी. को आधार कार्ड के लिंक करने के कार्य जो बड़े जोर-सोर से चल रहा था जिसमें कार्य धीमे होने के कारण कुछ एक बीएलओ पर एफआईआर दर्ज तक कर दी गई थी को तुरन्त प्रभाव से रोक दिया गया और जो डाटा लिंक किया गया था उसे नष्ट करने के आदेश दिए गए थे । फिर भी सरकार बहाने बहाने सरकारी व गैरसरकारी संस्थाओं के माध्यम से कर्मचारियों, आवेदन करने वाले उम्मीदवारों, आम व्यक्तियों, स्कूली विद्यार्थियों से आधार कार्ड व उसके नंबर की मांग कर रही। और वो सभी डरकर, भ्रमित होकर या कोई विकल्प न होने पर मंजूरी में इसे बानवा रहे हैं और दे रहे हैं। अबोध स्कूली विद्यार्थी जिसे अभी अपने भले- बुरे व अपने अधिकारों का ज्ञान भी नहीं के भी आधार कार्ड बनवाएं जा रहे हैं। सरकार ने बहाने से उनकी निजी स्वतंत्रता को उनकी सोच विकसित होने से पहले ही छीन लिया। और यह कार्य अब भी सरकारी व प्राईवेट स्कूलों में धड़ल्ले से जारी है। क्या यह घोर अन्याय नहीं है? यह किसी मालिक द्वारा अपनी भेड़ बकरियों व मुर्गियों के एक नंबर अलोट करने जैसा है जिसमें उसकी सभी जानकारियां छिपी हुई हैं और जिसे हजारों की भीड़ में पहचान कर उसका शोषण करने जैसा है। हर जीव को अपनी गोपनीयकता बनाएं रखने का हक है। मनुष्य उन सब में श्रेष्ठ है न की कोई जानवर। यह भविष्य में आपको घुट-घुट कर जीने पर विवश कर देगा। इसके दूरगामी परिणाम खतरनाक होंगे। यह इतना ओपन हो जाएगा की भारतीय एजेंसियां आम व्यक्ति की गोपनीयता बनाए रखने में विवश हो जाएगी। जब भारत की सर्वोत्तम अदालत, माननीय सुप्रीम कोर्ट आम व्यक्ति के हित की सोचकर उसके साथ खड़ा है तो आपको आधार कार्ड का खुलकर विरोध करना चाहिए। उठिए जागिए सोचिए कहीं आपके साथ घोर अन्याय तो नहीं हो रहा जिसकी आपको पहले भनक नहीं थी। 15 अक्टूबर 2015 / दैनिक जागरण आधार कार्ड का सामाजिक लाभ की योजनाओं में इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि इसका इस्तेमाल स्वैच्छिक ही होना चाहिए अनिवार्य नहीं. पांच जजों की संवैधानिक बेंच ने इसके साथ ही स्पष्ट शब्दों में कहा कि आधार कार्ड बनवाना अनिवार्य नहीं है और न ही इसके लिए कोई दबाव बनाया जा सकता है. कोर्ट ने अपने फैसले में सरकार को आधार कार्ड का इस्तेमाल मनरेगा, पेंशन स्कीम, ईपीएफओ और प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत करने की इजाजत दे दी है, लेकिन इसके स्वैच्छिक रखने की बात कही है. कोर्ट ने कहा कि आधार कार्ड के इस्तेमाल के लिए किसी को बाध्य नहीं किया जा सकता है. न ही हर किसी के पास आधार कार्ड होना जरूरी है. यह पूरी तरह नागरिक की स्वेच्छा पर निर्भर होना चाहिए. बड़ी बेंच करेगी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें बैंक अकाउंट खोलने के लिए आधार कार्ड के इस्तेमाल की इजाजत मांगी गई थी
आधार कार्ड के लिए जरूरी जानकारी और इससे संबंधित गोपनीयता के अधिकार के मामले में आगे 9 से 11 जजों की संवैधानिक बेंच अलग से सुनवाई करेगी. दूसरी ओर, सुनवाई के दौरान सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि आधार कार्ड की योजना गरीब से गरीब व्यक्ति को लाभ पहुंचाने के लिए है. आरबीआई, सेबी, पीएफआरडीए ने मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत की अपील की थी
कोर्ट का सख्त रवैया बुधवार की तरह गुरुवार को भी आधार कार्ड की अनिवार्यता के मुद्दे पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाए रखा. कोर्ट ने कहा कि अगर कोई आधार कार्ड पेश करने के लिए मजबूर करता है तो वह सुप्रीम कोर्ट की अवमानना का भागी होगा. गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने आधार की अनिवार्यता और निजता के अधिकार के हनन का मसला विचार के लिए संवैधानिक पीठ को भेजते हुए अगस्त महीने में आधार के उपयोग पर रोक लगा दी थी. कोर्ट ने पहले एलपीजी सब्सिडी और पीडीएस योजना में ही आधार के स्वैच्छिक उपयोग की इजाजत दी थी । जनहित में जारी,~<\div>
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